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लुधियाना (चढ़त पंजाब दी ) : श्री रामशरणम ने आज 84 घंटे के “अखण्ड जप यज्ञ” की पूर्णाहुति की गई। श्रद्धेय श्री नरेश सोनी (भाई साहिब) जी के पावन सानिंध्य में रविवार के प्रातः के सत्संग में हज़ारों साधको की उपस्थीति में बड़े ही भाव चाव से हुई ।

श्री नरेश सोनी जी ने कहा कि राम नाम सर्व प्रकार से सुख देने वाला है। राम नाम की पूंजी इस लोक और परलोक में काम आने वाली है। इस लिए हमें केवल राम नाम की पूंजी एकत्रित करनी है और उस की टेक लेनी हैं। हमें राम नाम पर अटूट भरोसा रखना है। राम नाम का जाप सब तीर्थों के स्नान से उत्तम है। कितना अंधकार क्यों न हो, राम नाम के जाप से वह दूर हो जाता है। राम नाम के जाप का सुअवसर हमें तभी मिलता है जब हमारे पुण्य कर्मो उदय होते है। सोनी जी ने जप यज्ञ की पूर्णाहुति करवाते हुए कहा कि इस जप-यज्ञ का उद्देश्य है । वृद्धि-आस्तिक भाव की शुभ मंगल संचार,अभ्युदय सदधर्म का राम नाम विस्तार ।। हम जो जो मनोकामना इच्छा लेकर इस यज्ञ में सम्मलित हुए हैं मेरे राम उन में से उचित मनोकामनाओ इच्छाओं को पूर्ण करना और हमें और जप सिमरन का सुअवसर प्रदान करना। हे मेरे राम हम भले है या बुरे हैं आप के हैं। हमारा आप के अतिरिक्त कोई सहारा नही है। हमें आप ने क्या क्या नही दिया है, पर हम पा कर भी बिसरा देतें है। आज हम आप की मेहरबानियों के लिए आप का शुकराना करते है और आप से आप के नाम का भरोसा मांगते हैं।
भाई साहिब ने कहा कि यह हमारे पुण्यकर्मो का परिणाम है जो हमें पूज्य श्री स्वामी जी महाराज और पूज्य पिता जी महाराज जैसे संत मिले। हमें गुरु पर और श्री राम पर पूर्ण विश्वास रखना है। हमें डोलना नही है। हमें कायरता का बाना उतार कर वीरता का बाना ओढ़ना है। हमें कुछ कर के बन के दिखाना है। हमें वीर का संग करना है। हमें भरत जी और लक्ष्मण जी जैसा भाई बनना है। मन में उद्दम भाव को लाना है। हमें सेवक हनुमान जी जैसा बनाना है। मन का स्वभाव नीचे की ओर जाना है परंतु मन को गुरु चरणों और राम नाम के सिमरन, सेवा और सत्संग में लगाना है तभी सफलता मिलेगी। प्रभु की कृपा से ही सत्संग, सेवा और दान करने का सुअवसर मिलता है। हमारे भाग्य में जो लिखा है वह तो मिलना ही है फिर चिंता किस बात की। अपने राम पर पूर्ण विश्वास रखना है। वह सर्व शक्तिमान है। इस भरोसे को कभी डोलने नही देना है। जितना विश्वास मजबूत होगा उतना ही आध्यात्मिक लाभ होगा। जितनी आध्यत्मिक उन्नति होगी उतनी शीघ्र मन को शांति मिलेगी और मनोकामनाये पूर्ण होगी, कष्टों कलेशों का निवारण होगा। अवगुणों से बचने के लिये संत शरण और सत्संग में अवश्य जाना चाहिए।सत्संग में जाने से मनुष्य को सही और गलत का बोध होता है। अंत में प्रभु श्री राम और गुरुजनों का शुकराना और सभी के लिये मंगल की कामना करते हुए सभा का समापन हुआ।