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नोटबंदी व जी.एस.टी के बाद बढ़ी स्टील की कीमतों ने उद्योग को बुरी तरह से प्रभावित किया: मनिन्दर लुधियाना ( ब्यूरो चढ़त पंजाब दीं ) :लुधियाना व्यापार मंडल के प्रधान मनिन्दर पाल सिंह गुलियानी के कहा है कि नोटबंदी व जी.एस.टी के प्रभाव का सामना कर रहे स्टील उद्योग को अब स्टील की कीमतों ने बड़ा धक्का दिया है। बीते एक माह में स्टील रिबर्स (टी.एम.टी बार्स) की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप कीमतों की अस्थिरता ने निर्माण क्षेत्र को चिंता में डाल दिया है और इसका बिल्डरों व निर्माताओं दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है।
इस क्रम में, आंकड़े बताते हैं कि स्टील की कीमतों में बीते एक माह के दौरान 25 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। स्टील कंपनियों द्वारा 30 दिनों के भीतर 9000 रुपए प्रति मीट्रिक टन रेट की बढ़ोतरी चिंता का विषय है। नवंबर 2017 के माह में टी.एम.टी रिबर्स के रेट 34000 रुपए प्रति मीट्रिक टन थे। सेल और आर.आई.एन.एल (दोनों भारत सरकार के उद्यम हैं) द्वारा कीमतों में 1000 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह से लेकर माह के अंत तक कीमतें 40000 रुपए प्रति मीट्रिक टन पहुंच चुकी हैं। जनवरी 2018 के पहले सप्ताह में कीमतों में 2500 रुपए प्रति मीट्रिक टन की बढ़ोतरी हुई है और आज 1000-1500 मीट्रिक टन की और बढ़ोतरी हुई है। अब आम व्यक्ति को एक टन स्टील खरीदने के लिए जी.एस.टी सहित 50000 रुपए अदा करने होंगे।
इससे पहले सेल, आर.आई.एन.एल जैसे रेटों में मासिक आधार पर बदलाव करते थे, जो अब सप्ताहिक या फिर सेमी डेली आधार पर बदल रहे हैं। इसने बाजार को असमंजस में डाल दिया है और चिंता का विषय बन गए हैं, जिसका असर न सिर्फ निर्माण कंपनियों, बल्कि नागरिकों पर भी पड़ रहा है।
माह अगस्त 2016 में रोचक बात सामने आई थीं कि टी.एम.टी बार की कीमतें 28000 रुपए प्रति मीट्रिक टन थीं, जिसमें सेल और आर.आई.एन.एल–विजर्ग ब्रांड की लुधियाना में एक्साइज ड्यूटी शामिल थीं। जून 2017 में 10.5 प्रतिशत की एक्साइज ड्यूटी मिलाकर कीमतें 37000 रुपए प्रति मीट्रिक टन थीं। जुलाई 2017 में जी.एस.टी आने पर एक्साइज ड्यूटी सहित अन्य सभी टैक्स खत्म कर दिए गए थे और जी.एस.टी को छोड़कर कीमतें 33000 रुपए प्रति मीट्रिक टन थीं।
लुधियाना व्यापार मंडल इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहा है और आगामी दिनों में फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए कानूनी सलाह ले रहा है।
हालांकि मनिन्दर ने स्टील निर्माता कंपनियों पर सरकारी निगरानी की अनुपस्थिति सहित कई तथ्यों की पहचान की है, जो तीन या चार कंपनियां कुल उत्पाद का 70 प्रतिशत कंट्रोल करती हैं। उन्होंने स्टील के निर्माण में इस्तेमाल की जातीं, आयरन ओर, कोल सहित कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का भी खुलासा किया है। कीमतों में बढ़ोतरी से न सिर्फ ग्राहकों पर बुरा प्रभाव पड़ा है, बल्कि छोटे व्यापार पर भी ज्यादा असर पड़ा है।
सीमित संसाधनों के चलते छोटे व्यापारी मटीरियल स्टोर नहीं कर सकते और इससे हालात बद से बदतर हो चुके हैं। जिसका कारण प्रमुख स्टील उत्पादकों और कुछ बड़े ग्राहकों/व्यापारियों में मिलीभगत होना है।
प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में, एल.बी.एम ने सेल व आर.आई.एन.एल द्वारा मटीरियल के वितरण, कीमतों के मूल्यांकन की प्रक्रिया की गहराई से जांच की मांग की है। एल.बी.एम ने बड़े घरानों से मिलीभगत करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की भी मांग की है। |
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