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लुधियाना 20मार्च ( ब्यूरो चढ़त पंजाब दीं ) : तेरापंथी महासभा के पंजाब प्रभारी कुलदीप जैन सुराणा के किचलू नगर स्थित निवास स्थान पर आचार्य महाश्रमण जी के मनीषी शिष्य सन्त विनय कुमार जी आलोक के सानिध्य में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुनि श्री ने प्रथम सुख निरोगी काया पर फरमाते हुए कहा कि मनुष्य को हर पल आनंद की आकांक्षा रहती है, मनुष्य इसकी खोज के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है। किसी को पढ़ने में आनंद आता है और किसी को खेलने में किसी को लिखने में आनंद आता है तो किसी को बड़ी-बड़ी बातें करने में कोई चापलूसी करने में आनंद लेता है तो किसी को चापलूसी करवाने में मजा आता है। मनुष्य आनंद की अनुभूति कर लेता है लेकिन वह आनंद थोड़ी देर बाद गायब भी हो जाता है जैसे बादलों की ओट में सूर्य छिप जाता है। अक्सर यह भी देखा गया है कि जितना हम आनंद के पीछे भागते हैं उसके लिए छटपटाते हैं उतना ही ये हमसे दूर भागता हुआ दिखाई देता है। हमारी स्थिति कुछ उसी तरह की हो जाती है जैसे मरुस्थल में पानी ना मिलने पर एक व्यक्ति होती है यानी मृग मरीचिका वाली स्थिति में पहुंच जाते हैं और विवादों से गिर जाते हैं। आनंद पाने के लिए जरूरी है सरलता और सहजता। जब भी आप सहज और सरल होते हैं आप उतने ही आनंद के समीप होते हैं। हम देखते हैं कि छोटा बच्चा सदैव आनंद और मस्ती में रहता है क्योंकि वह सरल और सहज अवस्था में जीता है। हम आनंद खोजते हैं, पदार्थों में, धन दौलत में, पद प्रतिष्ठा में, कंचन कामिनी में, और जमीन जायदाद में, लेकिन हम अभिज्ञ है कि वास्तविक आनंद की गंगोत्री तो हमारे भीतर बह रही है। हो सकता है कि वस्तुएं और अनुकूल परिस्थितियां थोड़ी देर के लिए खुशियां सुख प्रदान कर दे लेकिन यह आनंद कभी स्थाई नहीं हो सकता। आनंद की प्राप्ति तो सकारात्मक विचारों से होती है। किसी विद्वान ने कहा है कि आपके जीवन की खुशी आपके विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। क्या कभी आपने किसी के दुख को अपना दुख समझा है? क्या आपने कभी किसी भूखे को भोजन कराया है? नंगे के बदन पर वस्त्र ओढ़ाया है या किसी प्यासे को पानी पिलाया है? किसी बीमार का उपचार कराने में मदद की है? जो प्यासा होने पर भी आपसे एक गिलास पानी मांगते हुए झिझकता हो उसे पानी पिला कर तो देखिए आपको कितना आनंद आएगा। किसी भूखे को खाना खिला कर तो देखिए आपको कितनी तृप्ति मिलती है। दीन दुखियों की सेवा आनंद का स्रोत है।
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध ह्रदय चिक्तिसक डा: विश्व मोहन, प्रो: राजिन्दर भंडारी, पार्षद विपन विनायक, सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल, संजय गोसाई, खजूर पार्क किचलू नगर के निवासीयो के साथ तेरापंथ समाज के सभी मुख्य श्रावक-श्राविकाएं उपस्तिथ हुए ।